अमेज़न क्विज खेले और जीते Samsung Galaxy M21 | Gold Rate Today

कोरोना संकट: प्रॉपर्टी की कीमतों में क्या हो सकती है भारी गिरावट, जानें डेवलपर्स की राय

कोरोना की वजह से प्रॉपर्टी और जमीन की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है. बड़े शहरों में 25-35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है. अगर आप जमीन या प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो आपके पास सुनहरा अवसर है. विशेषज्ञों और डेवलपर्स ने हाल ही में बिल्डरों को कम कीमतों पर प्रोजेक्ट्स को बेचने की सलाह दी.

जरूर पढ़े: Updated Google Assistant आपके WhatsApp मैसेज को पढ़कर सुनाएगा

क्या भारत में रियल एस्टेट सेक्टर में कीमतें बहुत ज्यादा है और इस संकट को पार करने के लिए और बिक्री को दोबारा सही दिशा में लाने के लिए कीमतों को वास्तविकता के साथ लागू करने की जरूरत है. यह सवाल फिर से आगे आया है क्योंकि केंद्रीय रेल और वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में बिल्डरों को कम कीमतों पर प्रोजेक्ट्स को बेचने की सलाह दी है जिससे उनकी अनसोल्ड इन्वेंट्री क्लियर हो सके. कोरोना के चलते देश के साथ-साथ हर क्षेत्र प्रभावित हो चुका है.

कोरोना संकट: प्रॉपर्टी की कीमतों में क्या हो सकती है भारी गिरावट

इस महामारी के चलते एक रिपोर्ट आई है जिसके अनुसार बताया जा रहा है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की कीमत 10-20 प्रतिशत तक गिर सकती है वहीं जमीन की कीमत 30 प्रतिशत तक सस्ती हो सकती है.

corona-crisis-huge-drop-in-property-and-land-prices

प्रॉपर्टी और जमीन की दामों में गिरावट आती है तो यह पिछले एक दशक में यह सबसे बड़ी गिरावट होगी. यह जानकारी रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म लिआस फोरास की तरफ से जारी की गई है. पिछले साल एनबीएफसी संकट के चलते रियल एस्टेट कंपनियों के पास लिक्विडिटी की कमी आ गई थी जिससे हालात बिगड़ गए थे. और डेवलपर्स को छूट की पेशकश करनी पड़ी थी. इस साल कोरोना की महामारी के बाद खरीदार बड़ी कटौती की उम्मीद कर सकते हैं.

जरूर पढ़े: Car care in Lockdown: Coronavirus लॉकडाउन में कार को सुरक्षित रखने की टिप्स

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रियल एस्टेट डेवलपर अपने पास ज्यादा कीमत वाली प्रॉपर्टी पकड़ कर रखते हैं. इसलिए उनके पास उनके पास निर्माण करने और प्रोजेक्ट्स को कम और वास्तविक कीमतों पर बेचने और बाजार के सुधरने के लिए इंतजार नहीं करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. केवल इससे ही वे इस संकट को पार कर सकते हैं.

बहुत से इंडस्ट्री के विशेषज्ञों और डेवलपर्स ने यह भी कहा है कि कीमतों में कटौती मौजूदा समय में संभव नहीं है क्योंकि बहुत से कारक अभी भी डेवलपर्स के काबू में नहीं है. कोरोना के इस प्रकोप की वजह से देश में सीमेंट की मांग में चालू वित्त वर्ष के दौरान 20- 25 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. जानकारों की मानें तो यदि मई तक इस महामारी पर काबू नहीं पाया गया तो निर्माण गतिविधियां वर्ष की दूसरी तिमाही तक ही शुरू हो पाएगी जिससे सीमेंट की खपत में भारी गिरावट आने की आशंका है.

उदाहरण के लिए ANAROCK प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि जहां तक कम प्रॉपर्टी रेट तार्किक लगते हैं, यहां बहुत से कारक शामिल हैं जिसमें से कुछ डेवलपर्स के काबू से बाहर हैं. मुंबई जैसे कुछ शहरों में RR रेट्स और बाजार की कीमतों में बहुत कम अंतर है. सर्किल रेट से नीचे प्रॉपर्टी को बेचना कानूनी तौर पर संभव नहीं है. इसलिए सरकार को कीमतों को कम करने की जरूरत है जिससे डेवलपर कटौती कर सकें. लॉकडाउन ने रेसिडेंशियल रियल एस्टेट को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. जिसकी वजह से सेक्टर की रिकवरी को कम से कम एक से दो साल लग सकते हैं.

जरूर पढ़े: Coronavirus – घर में लॉकडाउन होने से बढ़ रहा स्ट्रेस? 7 टिप्स फॉलो कर मिलेगी राहत

इसके साथ सेक्टर को मदद एक रूप से ज्यादा हो सकती है. उदाहरण के तौर पर वित्त मंत्री ने हाल ही में एलान किया था कि ऐसी योजना बनाई जा रही है कि घर खरीदारों को छूट दी जा सके और घर खरीदार की भावना को बढ़ावा मिले जिससे रियल एस्टेट सेक्टर आगे बढ़े. पुरी ने कहा कि वे वित्त मंत्री सीतारमण के एलान का इंतजार कर रहे हैं. इसके अलावा सरकार के सभी कदम
नौकरी खोने पर लगाम लाने और बढ़ावा देने के लिए हैं और रियल एस्टेट सेक्टर पर सकारात्मक असर होगा.

रियल एस्टेट सर्विसेज कंपनियों ने कहा कि जाहिर है कि बिल्डर उपलब्ध इन्वेंट्री की कीमतों को बढ़ाना चाहते हैं, चाहें वह रेडी टू मूव इन या निर्माणाधान प्रॉपर्टी. इन दोनों की कीमतों में अंतर है और यह मुख्य तौर पर बाजार पर निर्भर करता है.

Housing.com, Makaan.com और Proptiger.com के ग्रुप सीओओ मणि रंगाराजन ने कहा कि जहां खरीदारों ने रेडी टू मूव इन घरों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति दिखाई है, मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति नहीं है. पिछले कुछ सालों में अधिकतर टियर 1 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में ज्यादा बड़ोतरी नहीं हुई है और आगे भी होने की उम्मीद नहीं है. हालांकि, बिल्डर खरीदारों को खरीदने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रोत्साहन पेश कर रहे हैं जैसे प्राइस प्रोटेक्शन स्कीम्स, पेमेंट्स प्लान और ऑफर जैसे स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज पर छूट.

इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर को सरकार के दखल और समर्थन की बहुत जरूरत है.

आवासीय घरों की बिक्री में वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान टियर 1 शहरों में पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी की गिरावट हुई है. मांग के प्रोत्साहित करने की जरूरत है जिसके लिए सरकारी दखल चाहिए. इसमें वन टाइम लोन रिस्ट्रक्चरिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट, जीएसटी दरों में कटौती और कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी पर नियंत्रण शामिल हैं.

जरूर पढ़े: UAN (Universal Account Number): यूएएन नंबर खोजने का आसान तरीका

CASAGRAND के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण एमएन ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर ने महामारी के दौरान बड़े नुकसान देखे हैं. निर्माण के मैटिरियल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ मजदूरों की कमी अभी भी सेक्टर के लिए मुश्किल बने हुए हैं. इसके अलावा सेक्टर के लिए जीएसटी में कटौती और होम लोन पर कम ब्याज दर जैसे कदमों से सेक्टर को तेजी से रिकवर करने में मदद मिल सकती है.

GET MORE STUFF LIKE THIS IN YOUR INBOX

Subscribe and get updates direct in your email inbox.


We respect your privacy.