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मोबाइल नंबर को पोर्ट कैसे करें

भारत मे 4G मोबाइल नेटवर्क के आने के बाद भारतीय मोबाइल नेटवर्क का नया दौर शुरू हो गया हैं। वर्तमान में सभी मोबाइल नेटवर्क कम्पनियाँ उपभोक्ताओं को लुभाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं। उपयोगकर्ता अपनी सुविधानुसार मोबाइल नेटवर्क कम्पनी को अपने वर्तमान नेटवर्क से बदल सकता हैं।

मोबाइल नंबर पोटेर्बिलिटी क्या है

मोबाइल नंबर पोटेर्बिलिटी (एमएनपी) के तहत आप अपना मोबाइल नंबर बदले बिना अपने मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर को बदल सकते हैं।

port Mobile Number

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port Mobile Number कैसे करें

1. मोबाइल मैसेज बॉक्स में जाएं, टाइप करें PORT। कृपया 1900 नंबर पर स्थान और एसएमएस देकर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें। उदाहरण: PORT 9214456789

2. प्राप्त एसएमएस में, आपको नंबर 8 कोड और इसकी समाप्ति की तारीख मिलेगी। इस कोड को यूनीक पोर्टिंग कोड (UPC) कहा जाता है।

3. इनसाइड, इनसाइड प्रूफ, आइडेंटिटी प्रूफ, फोटो, यूपीसी और अपने मोबाइल नंबर का जिक्र करने वाले एप्लिकेशन फॉर्म के साथ नए सर्विस प्रोवाइडर के पास रिटेल आउटलेट पर जाएं। वहां आपको एक फॉर्म भरना होगा और एक नया सिम खरीदना होगा।

4. ऑपरेटर मोबाइल क्लीयरिंग हाउस में आपके दस्तावेज़ और फॉर्म भेजेगा। इसके बाद आपको अपने वर्तमान कनेक्शन पर नए सेवा प्रदाता से एसएमएस प्राप्त होगा, जिसमें उसे एक तारीख और समय दिया जाएगा, जिसके दौरान आपके मोबाइल फोन पर कोई सेवा अवधि (काम नहीं करेगा)। इस दौरान आपके सेवा प्रदाता को बदल दिया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में दो घंटे लगेंगे। इस दौरान आप अपने फोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। यह समय रात 12 से 5 बजे के बीच होगा। सुबह में, अपने मोबाइल सेट से पुरानी सिम को हटा दें और नया दर्ज करें। नंबर वही रहेगा, ऑपरेटर बदल जाएगा।

कितने दिनों में मोबाइल नंबर पोर्ट होगा

कम-से-कम चार दिन में और अधिकतम सात दिनों में प्रोसेस पूरा हो जाएगा।

कितने रुपये में

इसके लिए आपको सिर्फ 19 रुपये अपने नए सर्विस प्रोवाइडर को देने होंगे। वर्त्तमान में सर्विस प्रोवाइडर ये सुविधा मुफ्त में भी प्रधान कर रहे हैं।

कौन यूज कर सकते हैं

अगर आप जीएसएम टू जीएसएम, सीडीएमए टू जीएसएम या फिर कोई दूसरा कनेक्शन यूज कर रहे हैं, तो भी आप इस सर्विस का फायदा उठा सकते हैं। पोस्टपेड या प्रीपेड, दोनों नंबरों के लिए यूज कर सकते है।

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अगर नए वाले से भी असंतुष्ट हों तो

अगर नए सर्विस प्रोवाइडर से भी खुश नहीं हैं और उसे भी बदलना चाहते हैं, तो इसके लिए कम-से-कम तीन महीने उसके साथ रहना होगा। उसके 90 दिन बाद ही फिर से अपना सर्विस प्रोवाइडर बदल सकते हैं।

क्या है फायदा

ऑपरेटर बदलने के साथ आप अपना प्लान भी बदल सकते हैं। यानी अगर आप पोस्टपेड कटमर हैं तो नए ऑपरेटर के यहां प्रीपेड प्लान भी ले सकते हैं।

इन बातों का रखें ख्याल

1. प्रीपेड मोबाइल कस्टमर अपना सर्विसस प्रोवाइडर बदलने से पहले अपना मौजूदा बैलेंस लगभग जीरो कर लें, क्योंकि नए ऑपरेटर पर जाने के बाद पुराना बैलेंस ट्रांसफर नहीं होगा।

2. पोस्टपेड कस्टमर तब तक अपना ऑपरेटर नहीं बदल सकते, जब तक कि पेंडिंग बिल की पेमेंट न कर दी गई हो।

3. एक बार नंबर पोर्ट करवाने के बाद आप अगले 90 दिनों तक दोबारा पोर्टेबिलिटी का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

4. ऑपरेटर को सिर्फ वहीं बदल सकते हैं, जहां का नंबर हैं। मतलब नंबर दिल्ली का है तो ऑपरेटर दिल्ली में ही बदल सकते हैं किसी और राज्य में नहीं।

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